Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 174 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
स च संप्राप्यते शुद्धो बोधो ध्यानमनुत्तमम् ।
शास्त्रात्पदपदार्थज्ञबोधिनोत्पन्नबुद्धिना ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
चिन्मात्रआकाशस्वरूपी जन्मादिविकारविहीन परम
ब्रह्म मे (अहम्) (मैं) , त्वम् (तुम), जगत् इत्यादि संकल्पमात्ररूप जो भान हुआ है वह ब्रह्मरूप ही है ।
यानी समष्टि के चिन्मात्ररूप सिद्ध होने पर उसके व्यष्टिरूप हम लोगों का अनुक्त भी चिन्मात्रत्व
स्वयम् सिद्ध हो गया, यह भाव है