Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 174, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 174 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
सम्यक्प्रबोधान्निर्वाणं परं तत्समुदाहृतम् ।
यथास्थितमिदं विश्वं तत्रालं प्रलयं गतम् ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामजी,
अपने वास्तविक रूप का त्याग न कर रहे चिदाकाश का स्वप्नकी तरह अन्योन्य के धर्मो के आदान-
प्रदान से व्यत्यस्त चेतनतावाला, मन की समष्टि से उपहित जो रूप हे वह मन, ब्रह्मा, पितामह इत्यादि
शब्दों से कहा गया है