Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, Verse 28

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 170, verse 28 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 170 · श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

कार्याणामार्यमर्यादाचार्या चातुर्यशालिनी । सर्वेषामस्य मान्यस्य सत्यता स्वार्थदायिनी ॥ २८ ॥

हिन्दी अर्थ

तत्त्ववेत्ताओं की वह कोई अपूर्व (अनूठी) ही गाढ़ी नींद है जो चिन्मात्र के दर्शन में प्रबुद्धों की (जागरूकों की) भी बाह्नन्द्रियों को बन्द कर देती है अथवा व्यवहार में जागरूकों की भी बाह्नोन्द्रियों के रूपादि दर्शन को दर्शन आदि के विषय में बन्द कर देती है