Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 60

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

इतने विस्तार के साथ प्रतिपादित प्रतिदिन दुहराये तिहराये गये उपदेश से भी कुछ मन्दअधिकारियो को अप्रबुद्ध जानकर भगवान्‌ श्रीवसिष्ठजी उनके लिए शोक प्रकट करते है । यद्यपि मैं अपने अनुभव में आ रहे आत्मतत्त्व को इस प्रकार विशदरूप से बार-बार ऊँचे स्वर से प्रकट कर रहा हूँ, फिर भी मन्दअधिकारी लोगों के हृदय में बद्धमूल मूढता (अज्ञान) स्वप्नतुल्य जगत्‌ में यह जाग्रत्‌ सत्य ही है ऐसी बुद्धि का त्याग नहीं करती है, यह महान्‌ खेद का विषय हे । जानता हुआ भी अधिकारी शीघ्र उसका त्याग नहीं करता । मोह की प्रबलता की बलिहारी है