Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 169, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 169 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
निरानन्दमहानन्दी सुखमद्वैतमक्षयम् ।
निरालोकमहालोको हा शेते सुखमात्मवान् ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
शून्य दृश्य सा
विकास को प्राप्त होता हे, इस विषय में यानी असत् के विकास में स्वानुभूत स्वप्नस्वरूप दृष्टान्त का
जो अपलाप करता है वह कुमति भेडिया द्वारा अपने अपहरण का भी अपलाप करेगा