Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, Verse 26
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 164, verse 26 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 164 · श्लोक 26
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
स्वप्न मे अपने मरने की तरह और मरुभूमि मेँ मृगतृष्णा नदी की तरह प्रतीतिवश विद्यमान रहती
हुई भी ज्ञान से बाधित हुई अविद्या है ही नहीं, ऐसा कहते हैं।
जैसे स्वप्नों में अनुभूत भी स्मरण मिथ्या है और जैसे मरुभूमि में विद्यमान भी जलभ्रान्ति असत्
है वैसे ही प्रतीतिवश विद्यमान भी यह अविद्या नहीं है