Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 162, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 162, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 162 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
द्रवस्थितिमिता यद्वत्सरिद्वारिणि वीचयः ।
चितौ स्थितिमितास्तद्वच्चेतनात्सर्गवीचयः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इसका जव यथार्थरूप में परिज्ञान
हो जाता है तब यह केवल चिदाकाश मात्र हे । जब आप सरीखे अज्ञानियों से ज्ञप्त होता हे तब यह
"जगत्" दृश्य है । अतः न तो यह सत् है और न असत् है, इसे क्या कहा जाय ?