Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 162, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 162, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 162 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
यदिदं चास्ति चाभाति तत्सर्वं परमार्थसत् ।
अन्यादृक्कारणाभावात्सर्गादावेव नोदितम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सव ध्यान लगानेवाले विज्ञ पुरुषों के अनुभव से सिद्ध है, ऐसा कहते हैं।
निर्विकल्प समाधि की प्रतिष्ठा से जिसका देहभान उच्छिन्न हो चुका ऐसे विज्ञ पुरुष के ध्यान में
साक्षिचिन्मात्ररूप के क्षणभर स्थित होनेपर जगदर्शन - सामर्थ्य क्या होगी कहिये इसलिए अज्ञानदृष्टि
से ही जगदर्शन-सामर्थ्य हो सकती हे