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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, Verse 55

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 156, verse 55 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 156 · श्लोक 55

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

ज्योतिषशास्त्र आदि में उक्त उपायों से उसका ज्ञानभर हो सकता है उसको उलटना शास्त्रों की भी सामर्थ्यके बाहर की बात है, ऐसा कहते है । ज्योतिषशास्त्र के परिज्ञान से भावी पदार्थ का ज्ञान होता है, किन्तु शास्त्र इससे कुछ अतिरिक्त अपूर्वं कार्य कदापि नहीं कर सकते