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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verses 50–51

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, verses 50–51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 50,51

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

चारों ओर से घेर रही ज्वालाओं से जल रहीं बालचमरियों से वह बडी भली दिखाई देती थी । जल रहे वन्य जीवों की वसा की गन्ध से उसने बादलों को आवृत्त कर दिया था। प्रलयाग्नि के समान भीषण फैल रही पूर्वोक्त वनाग्नि ने रेंग रहे साँप की तरह आपके आश्रम के साथ आपका शरीर और उस प्राणी का शरीर जला डाला