Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 44
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, verse 44 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 44
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
अग्नि से गुफारूपी घर से बाहर निकले हुए सिंहों की दहाड़रूपी डॉँट-फटकारों तथा साफ-साफ
सुनाई दे रहे चट-चट शब्दों से उसने दिगन्तरालों में रहनेवाले लोगों को बहरा बना दिया था