Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, Verse 17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 151, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 151 · श्लोक 17

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

अथवा जो "सोऽहम्‌" (वह मेँ हूँ) इस तरह की प्रत्यभिज्ञा का विषय तत्ता, अहन्ता आदि हे, वह भी केवल भ्रान्ति ही है, सत्‌मय नहीं हे । इस स्थिति में किसका आश्चर्य ऐसा नहीं कहना चाहिये । फिर भी जिस साक्षी द्वारा असद्रूप का स्वांग किया जाता है, उसमें सैकड़ों आश्चर्य हैं ही