Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 30
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, verse 30 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 30
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि सत्य ब्रह्म ही सब पदार्थो का कारण हो, सत्य कारण से उत्पन्न होने के कारण
वे भी सब सत्य हों। ऐसी अवस्था में सव कुछ ब्रह्म ही कैसे अथवा ब्रह्मअद्वैत कैसे ? इस पर कहते है।
हे महामते, उक्त शंका का उत्तर आपसे कहता हूँ, आप सुनें । वे पदार्थ कोन हैं जिन्हें आप सत्य
कारणवाले मानते हे ? स्वभावो के सत्य कारण से आप का क्या मतलब है ? क्या सत्य स्वभाववालों का
सत्य कारण आपको अभीष्ट है या मिथ्या स्वभाववालों का सत्य कारण ? क्या सजातीयो का सत्य
कारण आपको अभीष्ट है या विजातीयों का सत्य कारण ? प्रथम दोनों पक्षों में ब्रह्म से ब्रह्म ही उत्पन्न
होगा न कि जगत्। दूसरे दोनों पक्षों में ब्रह्म से उत्पन्न की सत्यतासिद्धि न होगी, यों जगत् की अकारणता
ही सिद्ध हुई फिर आपने क्या सिद्ध किया ? पूर्वोक्त सभी पक्षों में हम आपसे पूछते हैं। यहाँ आकाश का
क्या कारण है ? प्रथम दोनों पक्षों मे आकाशपदवाच्यता अवच्छेदक विलक्षणता की असिद्धि है दूसरे
दोनों पक्षों मे उसकी सत्यता की असिद्धि है