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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 150, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 150 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

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हिन्दी अर्थ

उक्त विषय में विवेक की सामर्थ्य न होने से मुझे चुप हुए देखकर उन मुनि महाराज ने पूर्वजन्मो के सब वृत्तान्तो के साथ उनके साक्षी आत्मा का स्मरण कीजिये, यह कहा, ऐसा कहते हैं। आप कौन हो और कहाँ पर स्थित हो, सम्पूर्णतः आत्मा का स्मरण कीजिये कहाँपर हूँ यह दृश्य क्या है क्या यह सारभूत वस्तु है और क्या असार ही है ?