Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 15, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 15 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
जगद्बीजमहंत्वं यो मार्ष्टि वोधादवेदनात् ।
अलं चित्रं जलेनेव तेन धौतं जगन्मलम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
यही कारण है कि अहंकार के फरिमार्जन से जगत् का परियार्जन हो जाता है, यह कहते हैं ।
जो मनुष्य जगत् के बीज इस अहंकार को अनहंभावरूप ज्ञान से नष्ट कर देता है मानों वह
मल से परिपूर्ण जगद्रूपी चित्र को उसी ज्ञानरूपी जल से बिलकुल धो डालता है