Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 21
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, verse 21 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 21
संस्कृत श्लोक
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हिन्दी अर्थ
अज्ञान से आवृत अनियन्त्रित चिति जाग्रत्
और स्वप्न है, परिश्रम आदि निमित्त से नियन्त्रित हुई वह सुषुप्ति है तथा प्रयत्न से नियन्त्रण में लाई
गई उक्त चिति समाधि है। अज्ञान का विनाश हो जानेपर वही मुक्ति कहलाती हे । ऐसी परिस्थिति
में जाग्रत् के निरोध से मनोव्यापारमात्ररूप अन्य शोक है। जब तक संवित्-भान का नियन्त्रण रहता
है तब तक सुषुप्ति में आत्मा ही सर्व शोकान्तर है ऐसा जानकर शोकरहित समाधि सुखरूपी विश्राम
चाहनेवाला पुरुष नियमन ही करें