Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 149, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 149 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
अन्यमुनिरुवाच ।
साधो साधु विविक्तान्तःकरणे यत्तु कारणम् ।
सद्वासद्वास्य दृश्यस्य कस्माज्जानासि कथ्यताम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
इसलिए केवल सन्मात्र ही नियत सत्तावान् है उससे अतिरिक्त सबकी सत्ता अनियत हैं, ऐसा
कहते हैं।
केवल सन्मात्र ब्रह्म को छोड़कर और सबको तुम सदा सत्य-असत्य, नियत-अनियत रूप से
स्थित समझो