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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 148, Verse 24

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 148, verse 24 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 148 · श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

एतावत्येव नियतिरत्र यन्नाम यद्यथा । यावत्प्रस्फुरितं भानं तत्तथा न तदन्यथा ॥ २४ ॥

हिन्दी अर्थ

आप तो तत्त्वज्ञ थे फिर आपको उस समय कैसे व्यामोह हुआ ? इस पर कहते है । उस समय मेरा वह बोध प्रौढ नहीं हुआ था, इसलिए बन्धु-वान्धवों की वासना द्वारा वह तिरस्कृत हो गया । अब तो मेरा बोध अत्यन्त प्रौढ हो गया है आज तो किस दुर्वासनाजाल में उसे डिगाने की सामर्थ्य हे ?