Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 147, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 147 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
चिद्भामात्रमनारब्धमप्यारब्धमिव स्थितम् ।
देशकालक्रियाद्रव्यसर्गसंहारसंयुतम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
सकल दृश्य का विलय होनेपर ही सुषुप्ति होती है सुषुप्ति में भी तत्युषुप्तात्मनो दृश्यात्" दृश्य के
अस्तित्व का कथन सुनकर उसको असंभव समझ रहा व्याध पूछता है।
व्याध ने कहा : महाराज, आप ^तत्सुषुप्तामनः यों तत्शब्द से और दृश्य पद से दृश्य का
व्यपदेश करते हैं, इसलिए सुषुप्तदुश्य कुछ है, ऐसा आपका अभिप्राय ज्ञात होता है, सो कृपया
सुषुप्तदृश्य का क्या स्वरूप है, यह मुझे समझाइये