Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, Verse 18

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 145, verse 18 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 145 · श्लोक 18

संस्कृत श्लोक

कदलीकन्दलीकुन्दकदम्बकृतशेखराः । गिरिमालाश्चलच्चारुलीलापल्लवपेलवाः ॥ १८ ॥

हिन्दी अर्थ

वही शम, दम आदि साधनसम्पत्ति सम्पन्न श्रवण, मनन आदि द्वारा निश्चित अद्वितीय प्रत्यगृब्रह्मरूप वेदान्तवाक्यों का अर्थ होकर पहले से प्रसिद्ध द्वैतसृष्टि का बाधक हो अपने यथास्थित (यथार्थ) स्वभाव में प्रवृत्त होता हे । इसके इस तरह के स्वभाव का निर्णय कर ज्ञानीजन परम पुरुषार्थ की शिष्यो में भी सिद्धि हो इस अभिमान से पहले अज्ञात आत्मा ही जगत्‌ का आधारस्तम्भरूप सार हे