Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 64
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, verse 64 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 64
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
संवित् विनाशी मूर्तं पदार्थ की तरह
भासती है ओर अविनाशी अमूर्तं की तरह भी वही भासती हे । वस्तुतः तो नाश भी नहीं है, क्योकि
वह प्रतिधा (नाश) भी अन्त मेँ निवृत्त हो जाती है, केवल संवित् का ही परिशेष रहता है