Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 144, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 144 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
एकमेव चिदाकाशं साकारत्वमनेककम् ।
स्वरूपमजहद्धत्ते यत्स्वप्न इव तज्जगत् ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
जगत् की सत्यता का भंग होनेपर स्वाप्न वस्तुओं की प्रकृति के समान जगत् का चिन्मात्र में ही
पर्यवसान होता है, ऐसा कहते है ।
जैसे तुम्हारे हृदय में स्वप्ननगरी हे वैसे ही ब्रह्मा के हृदय में यह सृष्टि है जसे स्वाप्नी कार्यकारणता
मैंने तुमसे कही है वैसी ही कार्यकारणता उसमें हे