Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verses 4–5
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, verses 4–5 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
युयुधे दानवैः सार्धमजयत्सर्वशात्रवान् ।
शतं चकार यज्ञानामज्ञानोत्तीर्णमानसः ॥ ४ ॥
उवास कार्यवशतो बिसबालान्तरे चिरम् ।
अन्यान्यपि च वृत्तान्तशतान्यनुबभूव ह ॥ ५ ॥
हिन्दी अर्थ
उसने दानवं
के साथ युद्ध किया, अपने शत्रुओं को जीता तथा अज्ञान को पार कर चुके मनवाले उस राजा ने सौ
अश्वमेध यज्ञ किये