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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, Verse 20

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 14, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 14 · श्लोक 20

संस्कृत श्लोक

ततोऽस्मिन्विचरन्सर्गे शक्रान्ते शक्रतां गतः । चकार राजतां राज्यं वृत्तान्तशतशोभितम् ॥ २० ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर हम लोगों के इस ब्रह्माण्ड में पाताल, भूमि आदि लोकँ के क्रम से इन्द्र-लोक के भीतर मन से विचरण करता हुआ वह इन्द्र के समीप पहुँचा । वहाँ इन्द्र को देखते ही भे इन्द्र हूँ" इस संस्कार के उद्बुद्ध होने तथा पूर्व में किये गये सैकड़ों वृत्तान्तों से शोभित अनेक भुवनों का राज्य किया