Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 138, Verse 50
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 138, verse 50 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 138 · श्लोक 50
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
प्रसंगतः चुषुप्ति ओर तुरीयका तत्त्व, जो पूछा नहीं गया था, कहते है।
इस तरह जाग्रत और स्वप्न के तात्तिक स्वरूप का विचार कर रहे मेरे मन में सुषुप्ति का क्या
स्वरूप होगा ? ऐसी मति उदित हुई । इसलिए मैं सुषुप्ति की खोज में प्रवृत्त हुआ