Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 133, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 133, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 133 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तस्मिन्पतति भीमात्मन्यपारावारदेहिनि ।
सप्तद्वीपां वसुमतीं परिपूरयति क्षणात् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
तो वर्होपर लौकिक और वैदिक व्यवहार कैसे चलता था ? इस प्रश्नपर कहता है ।
उसके बाद मैंने अपने से ही प्रकाशमान वैसा जगत् देखा, जहाँपर न तो पूर्व, पश्चिम आदि
दिशाओं का भेद था, न दिन थे, न मर्यादास्थापक शास्त्र ही थे, न वेदवाद थे और न दैत्य आदि,
सुर आदि विभेद ही था