Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
न दिग्विभागो न दिनानि यत्र न चैव शास्त्राणि न वेदवादाः ।
न चैव दैत्यादिसुरादिभेदो जगन्मया तादृगथात्मदीप्तम् ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
यह निराधार महान् लोक जनाधार कैसे है ? इस प्रश्न पर कहते है ।
जैसे आकाश में टिके शहद से सने हुए गेंद में चारों ओर चींटियाँ घूमती हैं वैसे ही उसमें तदाश्रित
प्राणी नित्य चारों ओर घूमते हैं