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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 53

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 53 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 53

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

दूसरी जगह मैंने दूसरा आश्चर्य देखा, वह है इस जगत्‌ में जितने ग्राम-गृह हैं वे सबके सब अन्धकार से वेकाम हुई दृष्टि से ही आकाशमार्ग से जाते हैं, दूरवर्ती दिगन्त में प्रविष्ट होते हैँ । वह आपका गाँव जो यहाँ था वही मुझे अन्यत्र मिला यह आश्चर्य है