Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 132, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 132 · श्लोक 29
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार वसिष्ठजी द्वारा वर्णित विपश्चित् के वरित की अपनी उक्ति द्वारा पुष्टि कर भास के
मुख से भी उसकी पुष्टि कराने के लिए विश्वामित्रजी ने कहा ।
हे राजन्, हे विपश्चित् अपर नामक भास, तुमने कितना दृश्य देखा, कितना भ्रमण किया उसमें
कितने की तुम्हें याद है संक्षेप में थोड़ा-बहुत कहो