Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, Verses 14–15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 13, verses 14–15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 13 · श्लोक 14,15
संस्कृत श्लोक
नारायणादिषु ततः कदाचिद्वीर्यशालिषु ।
क्वचिदेव निलीनेषु सत्स्वेकः ससुराधिपः ॥ १४ ॥
शस्त्रज्वालानलोद्भारैरयुध्यत महासुरैः ।
विजितस्तैर्महावीर्यैरतो व्यद्रवदाद्रुतम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद अपने पराक्रम से सुशोभित नारायण आदि जब
कहीं क्षीर-सागर में शयन कर रहे थे तव अकेले उस सुरेश्वर ने शत्रो की ज्वालारूपी अग्नि को
धारण करनेवाले बड़े-बड़े पराक्रमी असुरो के साथ युद्ध किया और बाद मेँ उनसे पराजित होकर
वह शीघ्र युद्धभूमि से भागा