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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

नाद्यापि तैरविद्याया लब्धोऽन्तो भ्रान्तिबुद्धिभिः । अनन्तेयमविद्येयमज्ञानपरिबृंहिता ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

तव तो मेघो से गिरे हुए जलबिन्दु, ओले आदि समुद्र, नदी आदि में नहीं गिरेगे, कारण कि जल में आकर्षणशक्ति का अभाव है, किन्तु दूर से भी तीरभूमि में आकर वहीं गिरेंगे, ऐसी आशंका होने पर कहते हैँ । जैसे कल्पवृक्ष रत्नों का आधार है, वैसे ही सदा सभी पदार्थो का आश्रय पार्थिव भाग ही है, इसलिए ये जलवृष्टि आदि पृथिवीपर प्रचुरमात्रा में गिरते हैं