Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
जलाद्यावरणास्तत्र न लगन्ति न सन्ति च ।
तद्धि निर्मलमाशून्यमालानं कल्पक्लृप्तिभिः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
कब आधिभोतिकता की निवृत्ति से आतिवाहिकता का शेष होता है, इस प्रश्नपर कहते हैं।
विचार से सर्परज्जु-भ्रान्ति के तुल्य यह आधिभौतिक शरीर जब अन्तर्हित हो जाता है तब
आतिवाहिक शरीर अवशिष्ट रहता है