Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 129, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 129 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
येन यत्रैव वर्षाणां लक्षलक्षाणि गम्यते ।
तत्र तत्र स्वभावेन चिता किमपि लक्ष्यते ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
प्रश्नों के उत्तर का उपसंहार कर अब प्रस्तुत विषय सुनाते है।
हे श्रीरामचन्द्रजी, यह दृश्यानुभव क्रम आदि से अन्त तक सारा का सारा मैंने आपसे कहा अब
आप लोकालोक पर्वतपर विपश्चित् का जो हाल हुआ उसे सुनिये