Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, Verse 12
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 128, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 128 · श्लोक 12
संस्कृत श्लोक
ततः परतरं शान्तं ब्रह्माकाशमनन्तकम् ।
न प्रकाशं न च तमो महाचिद्धनमव्ययम् ॥ १२ ॥
हिन्दी अर्थ
उस पर्वत का लोकालोक नाम पड़ने मे निमित्त कहते हैं।
परिखा के चारों ओर रहनेवाले नक्षत्रमण्डल के अतिदूरदर्शी होने तथा पर्वत के पर्यन्त किसी भाग
में अन्धकार रहता है और किसी भाग में प्रकाश रहता है, इसलिए वह लोकालोक (लोक-अलोक)
हे