Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 122, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 122, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 122 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
दिगन्तमालोक्य समुद्रपारे क्षणात्समायाम इति ब्रुवन्तः ।
स्वमन्त्रशक्त्योत्तमतां गतैस्तैरब्धिः पदैरेव तदा प्रविष्टः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
इसके बाद श्रीमान् सूर्य मानों उनके (विपश्चितं के) प्रताप का वर्णन करने के
लिए समुद्र के अन्दर प्रवेश कर अन्य लोक को (ज्योतिषियों के मत से पाताल लोक को और पौराणिको
के मत से मेरुपर्वत के उत्तर भाग में स्थित दूसरे वर्ष को) चला गया