Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, Verses 5–6
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 121, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 121 · श्लोक 5, 6
संस्कृत श्लोक
आसमुद्रं नदीवाहा इव दूरादुपागताः ।
इदं संपादयामासुर्विस्मयाकुलचेतसः ॥ ५ ॥
अहो नु दूरमध्वानं प्राप्ता वयमयत्नतः ।
प्रभावाद्देवदेवस्य वह्नेर्दिव्यैः स्ववाहनैः ॥ ६ ॥
हिन्दी अर्थ
तमाल
और ताड़ के पेड़ों में चंचल बच्चों की तरह क्रीड़ा के झूलनों से झुलाये गये, जलतरंगों से उछलकर
वृक्षाग्रों के कोमल पल्लवों पर आक्रमण करनेवाले तथा नाच रही नवीन लताओं से निकली हुई
पुष्पधूलियों से धूसर वायु उद्यानं में राजाओं की तरह मन्दगति से चलते हैं