Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, Verse 3

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 120, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 120 · श्लोक 3

संस्कृत श्लोक

वान्ति वाता वनोद्वान्तविविधामोदमांसलाः । पीतघर्मकणाः क्रान्तललनालकलालकाः ॥ ३ ॥

हिन्दी अर्थ

इस महाप्रलयकाल के तुल्य वियोग में (विरहरूप महती आपत्ति में) यहाँपर स्थित मुझे समाचार पहुँचाने द्वारा उससे (मेरी प्रिया से) संमानित करने के लिये जो मेरे घर जाय ऐसा दयालु दूत कौन होगा ? जो दूसरे के दुःख की निवृत्ति के लिये प्रेम से सरलतापूर्वक सदा प्रयत्न करे, ऐसा पुरुष संसार में है नहीं