Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 119, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 119 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
अस्मिन्काले कुवलयलताकोमला धूमलेखा नासारन्ध्रं मृदुगलबिलं मे प्रवृत्ता नियातुम् ।
उष्णा कृष्णा नकुलकलिता सत्वरं बालसर्पी भूमे रन्ध्रं तनुमिव दराद्दैर्घ्यसंकोचकुब्जा ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
खंजन की चोच में पतंगा पंख फड़फड़ाता है, काँपता है। उसका
पंख फड़फड़ाना क्यों है मानों वह पूर्वजन्मसंचित पाप की ऊँची जगह में पताका है