Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
कुपितां तामनुनेतुं यत्नपरः पान्थ एष पथि कान्ताम् ।
अवलोकय नरनायक कुसुमलताकुहरकेलितीरवने ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तालाब की लहरी, सुगन्धि के भार से मानों मन्दगामी तथा पुष्परस के
संसर्ग से नम वायुओं द्वारा कम्पित जलमिश्रितपंकभाग के पंक को नीचे दबाकर जल से पृथक करने
की चतुराईवश जिससे शीघ्रता से पट-पट शब्द हो रहा है, अपनी ध्वनि से खिन्न होकर उड़ हुए
पक्षियों की निवासभूत लताओं द्वारा छोड़ी गई पुष्पवृष्टि का विस्तार करती है