Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
वरवने वनवातविसारिणां चपलचन्द्रकचारुतरङ्गिणाम् ।
इह पयोनिधिरेव कलापिनां विसृतमुक्ततयेव विलासनः ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
कमल ओर
नीलकमल की केवल सफेद और काले रूपों से ही परस्पर विलक्षणता है, किन्तु इनकी जल से जड़
(अचेतन) चन्द्रसूर्यद्रेषरूप मूर्खतास्वरूप वृत्ति समान है