Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, Verse 12

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 118, verse 12 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 118 · श्लोक 12

संस्कृत श्लोक

तारं तीरतरौ स रौति तरलो यावद्बकः प्रोल्लसंस्तावत्पल्वलगोष्पदेऽम्बुकलिले यावद्बलाद्देहकम् । मज्जन्त्या प्रियवक्षसीव निपुणं त्रातं शफर्या भयाद्धृद्भङ्गेनमहापदीह हि मृतेनान्यद्भवेत्सौख्यदम् ॥ १२ ॥

हिन्दी अर्थ

हे सौम्य, जैसे ब्रह्माकार वृत्ति से (चरम साक्षात्कारवृत्ति से) महात्माओं का निर्मल मन शोभित होता है वैसे ही यह निर्मल सरोवर अपने में प्रतिबिम्बित मरूदेशवत्‌ निर्जल आकाश से शोभित है