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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, Verse 70

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 117, verse 70 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 117 · श्लोक 70

इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।

हिन्दी अर्थ

कवन; चोरी आदि से मुझे प्राप्त होने वाले धनावि भाग को न्यायदुक्त उपाय से कोर्ड सज्नन न ले जाय, इस आशंका से सन्त के खण्डन के लिए राजसभा में अवांछनीय कर्णकट प्रलाय कर रहे खल के प्रति अन्योक्ति द्वारा कोर्ड कहता हैँ । अरे कौए, अरे कठोररव सुननेवाले के कानों के चीर डालनेवाले काँव-काँव शब्दरूपी आरा ही तुम्हारा एकमात्र लक्षण है । मेरे भाग को कौए से भिन्न कोई न खा जाय इस आशंका से तुम सदा कौओं का आह्वान करते हुए काँव-काँव की रट लगाते रहते हो, तुम्हारा आज ऐसी शंका करना कहाँ चला गया ? तुम्ही मेरे एकमात्र बच्चे हो, तुम चिरकाल तक जीओ इस आशा से कोकिल के बच्चे को तुम व्यर्थ पालते हो । तुम एकमात्र कट्‌ बोलनेवाले, पुत्रभ्रान्तिसे तुम्हारा सुस्वरवाले कोयल के बच्चों को पालना भी मनोरथसिद्धि के लिए नहीं होगा, अपितु उपहासास्पद ही होगा