Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 49
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, verse 49 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 49
संस्कृत श्लोक
हारीतहारिहरितोपवनद्रुमासु वापीप्रमाणरणितामलकाकलीषु ।
ग्रामस्थलीषु गिरिगह्वरगोपितासु मन्ये मुदैष रमते स्वरसेन कामः ॥ ४९ ॥
हिन्दी अर्थ
खिले हुए और फूलों से भरे हुए कुकुरमुत्तारूप पुष्पपूर्ण
अर्घ्यपात्रं को धारण करनेवाले महान् पर्वत तेज मेघनिर्घोषों से गंभीर कन्दराओं नक्षत्रों से पूर्ण
आकाश की शोभा धारण करते हैं