Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
उन्निद्रकन्दलदलान्तरलीयमानकूजन्मदान्धमधुपोन्मदपामराणाम् ।
मन्ये न सा भवति तुष्टिरिहामराणां या गोकुलेषु गिरिगह्वरिणां नराणाम् ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
जिसमें सच्ची आय नहीं थी, किन्तु किंशुक एलरूप कल्पित आय थी, ऐसी वनपंक्ति को
दिखलाकर उस ओर सच्ची आयवाली वनराणि को कड पार्श्वचर दिखलाता है /
महाराज, यहो से दूर पर्वत की चोटी पर उत्तर दिशा की ओर सच आग से जल रही ऐसी ही वनपंक्ति
वायु द्वारा आकाश में कँपाई जाती है, कृपया दृष्टिपात कीजिये