Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, Verse 37
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 116, verse 37 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 116 · श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
आसन्नपीनजलदावलितालयानां गेहोपशल्यपरिफुल्लवनद्रुमाणाम् ।
लक्ष्मीः पलाशपटलावलिताम्बराणां घोषौकसां समवलोकय पर्वतेषु ॥ ३७ ॥
हिन्दी अर्थ
यहाँ दक्षिण महासागर के तीरपर इस वनपंक्ति को, जिसमें किंशुक के पेड फूले हैं,
अतएव जो जली हुई सी दिखाई देती है, सागर अपनी जलतरंगों से बार-बार सींचता है, देखने की
कृपा कीजिये