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Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 115, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 115 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

एते कदम्बवनकम्बलमम्बुदाभमाभान्ति भास्करपथानुगता वहन्तः । अस्याचलस्य वसुधेव तटं तवास्तु मा सूर्यरोधकनभस्थघनौघशङ्का ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

यह ऋक्षवान्‌ नाम का पर्वत लहरों में उलझे हुए मगरो को अपने ग्रसनेवाले सफेद पत्थररूपी दाँतों से युक्त गुहारूपी मुखो से भालू के समान घुर-घुर शब्द करता है