Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, Verse 11
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 110, verse 11 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 110 · श्लोक 11
संस्कृत श्लोक
कोटकोटिकुटीकुड्यकण्टकोद्भटसद्भटम् ।
चठत्कुण्ठितकोटाट्टकृटाटननटच्छटम् ॥ ११ ॥
हिन्दी अर्थ
ऐसा कहकर आवश्यक
अन्यान्य कार्यों के रहते भी (अत्यावश्यक अन्यान्य कार्यों को छोड़कर भी) राजा ने एक क्षण
में जैसे वर्षाऋतु में नूतन बगीचा मेघ द्वारा स्नान करता है वैसे ही गंगाजल से भरे हुए घड़ों
से स्नान किया