Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 109, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 109 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
रक्षांस्यप्यविनीतानि बद्धानि निगडैर्घनैः ।
धर्मार्थकामैरन्योन्यं चयापचयवर्जितैः ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, उक्त गुप्तचर जल्दी राजा से यह
कह ही रहा था कि प्रलय में जलप्रवाह (बाढ़) के समान दूसरा गुप्तचर राजमहल में प्रविष्ट
हुआ