Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 108, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 108 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

निवर्तते यतोऽशक्त्या वचनं गुणवर्णनात् । कवीनामचलाकारा भवेद्भा भूधरो यथा ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

हे मूढ़ लोगों, कहो तो "यह मेरा है यह मैं हूँ इस प्रकार की आस्था क्या ठीक है ? अर्थात्‌ अनुचित हे । अश्न : यदि आस्था अनुचित ही है, तो क्यो लोग उक्त फर आस्था करते है 2 उत्तर : हाँ, ठीक हे, जैसे बालक के संकल्प मेँ बालक को ही दिलचस्पी है अन्य को नहीं वैसे ही मूर्खजन ही इस असत्‌प्राय प्रपंचपर आस्था करते हैं, बुद्धिमान नहीं