Yoga Vasistha — Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Nirvana Prakarana Uttara (Liberation, Part 2), Sarga 107, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
निर्वाण प्रकरण (उत्तरार्ध) · सर्ग 107 · श्लोक 31
इस समूह का संस्कृत श्लोक-संरेखण अभी परिष्कृत किया जा रहा है; नीचे इसका हिन्दी अर्थ दिया गया है।
हिन्दी अर्थ
विश्व (जगत्) परम शान्त चिदाकाश ही है, चिदाकाश ही विश्व के आकार से स्थित है । वह
परिणामवश जगत् के आकार से परिणत नहीं हुआ, किन्तु अपने स्वरूप से च्युत हुए बिना स्वस्थ
सौम्य वह जगत् सा उदित हुआ है